थोड़ा सा horlicks

दरअसल horlicks मेरे  लिए  बहुत  खास  है . 

अब  यूँ  तो  horlicks बहुतों  के  लिए  बहुत  खास  है , खासकर  कि बढ़ते  बच्चों       
के  लिए , पर  मुझे  तब  भी  ऐसा  लगता  है  कि  मेरी  और  horlicks की  दोस्ती 
अनोखी  और  दूसरों  से  ज्यादा  गहरी  है . अगर  आपको  मेरे  इस  दावे  पर  कोइ 
ऐतराज़  हो , तो  बेशक  न  मानें , फिलहाल  तो  मैं  अपनी  दास्तान  सुनाऊँ , वही 
बेहतर  है .

बचपन  में  जब  जोरों  की  भूख    लगती  थी    और  बिस्कुट  नमकीन  से  ऊब  
जाते, तब  कुछ  मीठा  खाना  एक  वाजिब  सी  बात  थी  . 
उन  दिनों  न  तो pocket  money मांगने  की  उम्र  थी  और  न  ही  दुकान पे उधारी
की . ऊपर  से   माताजी  भी  chocolates छुपा  दिया  करती  थीं . अब  ऐसे  में 
अगर  एक  बढ़ा चम्मच  भर  कर  horlicks खा  लिया  जाये  तो  क्या  बुरा  है ?  
पर  असल  मज़ा  तो  इसमें  था की  जैसे  ही  पहले  चम्मच  वाला  horlicks मुंह    
में  घुलने  लगे  आप  झट  एक  चम्मच  और  डाल  लें , और  फिर  आराम  से ,
dheere dheere, छत  पर  धूप  में  बैठ  कर , उसका  आनंद  लें .
सर्दियों  में  तो  इसका  मज़ा  दुगुना ही  हो  जाता  है .

कभी  कभी  अगर  मैं  खुद  को  बहुत  दिलदार  महसूस  करती , तो  अपने  पालतू
दोस्त  cheeku को  भी  थोड़ा  horlicks दे  देती , आखिर  जानवरों  को  भी  तो 
calcium वगैरह की  आवश्यकता  होती  होगी , ऐसा  सोच  कर  मैं  अपनी  उस  श्रद्धा 
को  बढ़ावा देती . लेकिन  सच  तो  यह भी  है , कि  अगर  कोई  चीज़  आपको  बहुत 
बढ़िया  लगे  तो  अपने  मनपसंद  मित्रों  के  साथ  तो  बंटनी  ही  चाहिए , उससे  प्यार  
भी  बढ़ता  है , और  आपके  dentist  साहिब  के  यहाँ  जाने  की  नौबत  भी  घट  
जाती  है .

यही नहीं , मेरे  पिताजी  तो  आजतक  अपने   दूध  में  horlicks डाल  कर  पीते  हैं , 
और  कंजूसी  से  नाप  तोल  कर  नहीं , बल्कि  दिल  खोल  कर  डालते  हैं . 
और  क्यूँ  न  डालें , आखिर  horlicks बनाया  ही  लुत्फ़  उठाने  के  लिए  है ! 

हमारे  देश  भारत  के  अनेक मासूम  बच्चों  को  अपने  जीवन  में  board की  परीक्षा 
नामक खौफनाक  दौर  से  गुज़ारना  पढता  है . उस  समय , chemistry और  physics 
की  खतरनाक  किताबों  के  सामने  एक  बड़ा  mug horlicks वाला  दूध  पेश  किया  
जाये  तो  ज़िन्दगी  कितनी  सुहावनी  सी  लगने  लगती  है . 
यकीन  मानिये , maths के  सवाल  भी  बेहतर  सुलझने  लगते  हैं , 
कमज़ोर  आँखों  की  रौशनी  बढ़  सी  जाती  है , और  तो  और , थकी  हारी  उँगलियाँ
खटाखट सुन्दर  handwriting में  essay लिख  डालती  हैं .

पर  इसकी  असल  चमक  मैं  तब  परख  पाई  जब  मैंने  घर  से  बाहर  कदम
रखा . अजी  horlicks तो  छोडिये , दिन  भर  में  ढंग  की  चाय  मिल  जाये  तो 
गनीमत  है .

इसलिए  जब  भी  छुट्टियों में घर  आती  हूँ , खासकर  की  सर्दियों  में , तो  रात  में 
horlicks वाला  दूध  पी  कर  बहुत  सांत्वना  मिलती  है , ऐसा  लगता  है  मानों , 
कुछ  खो  गया  था   जो  फिर  से  पा  लिया .

प्रिय Horlicks तुम  सच  में  बहुत   खास  हो .
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About poornimasardana

Travel and Observations acquaint me with the Existent Pluralities around us and I wish to share those. I indulge in narratives (illustrations, words and pictures), it being my most cherished pursuit.
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