एक रात की एक बात

If there is something I am learning to empathize with, is the conflict deep within.

In my last poem, I expressed fear of darkness, here I embrace the night.

अगर रात में सोना ही था
तो रात इतनी खूबसूरत है क्यों
आसमान में जगमगाती इस इनायत के लिए तो पूरा दिन गुज़ारा है
अगर रात में सोना ही था
तो भला दिन में जागे ही क्यों

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